कोल्ड वॉर पीरियड

शीत युद्ध का दौर एवं उसके द्वारा पड़ने वाले प्रभाव की व्याख्या ?

शीत युद्ध का दौर (परिचय) –

शीत युद्ध का अर्थ शीत युद्ध से अभिप्राय है 2 या 2 से अधिक राज्य देशों के बीच ऐसी स्थिति बन जाए कि लगे कि युद्ध होकर रहेगा परंतु कोई रक्तरंजित युद्ध नहीं होता है शीतयुद्ध अमेरिका तथा सोवियत संघ के हुआ था। शीत युद्ध का दौर 1945 से लेकर 1991 तक था शीत युद्ध का दौर दूसरे विश्व युद्ध के बाद शुरू हुआ। शीत युद्ध इसीलिए आरंभ क्योंकि अमेरिका तथा सोवियत संघ (रूस )दोनों ही देश विश्व का सबसे बड़ी महाशक्ति बनना चाहते थे अमेरिका को पहली दुनिआ के नाम से जाना जाता था वही सोविएत संघ को दूसरी दुनिआ के नाम से।

शीत युद्ध के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी थे तथा सोवियत संघ के राष्ट्रपति का नाम Nikita Sergeyevich Khrushchev था

शीत युद्ध दौर की विशेषताएं

शीत युद्ध में दो शक्तिशाली गुट शामिल थे दोनों ही गुटों के पास परमाणु हथियार थे दोनों ही गुटों ने सैनिक गठबंधन बनाए हुए थे अमेरिका के सैनिक गठबंधन को नाटो के नाम से जाना जाता था तथा सोवियत संघ के सैनिक गठबंधन को वारसा पैक्ट नाम दिया गया। शीत युद्ध के दौरान दोनों गुटों एवं उनके सहयोगियों से यह आशा की जाती कि वह तर्कपूर्ण उत्तरदायित्व वाला व्यवहार अपनाएंगे

शीत युद्ध का प्रभाव :-

विश्व का दो गुटों में विभाजन

सैनिक गठबंधन की राजनीति

गुटनिरपेक्ष आंदोलन की उत्पत्ति

शस्त्रीकरण को बढ़ावा

गुटनिरपेक्षता का अर्थ

गुटनिरपेक्षता का अर्थ है कि किसी भी महाशक्ति के गुट में शामिल ना तथा अपना स्वयं का एक अलग गुट बनाना इस तरह देश अपनी नीति का निर्माण खुद करेगा ना की किसी के दबाव में आकर करेगा भारत में गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाने के कारण आर्थिक पुनर्निर्माण स्वतंत्र निर्माण करने के लिए भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए नई अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था व्यापार एवं विकास विकास में प्रस्तुत किया। भारत गुटनिरपेक्ष संस्थापक देशो शामिल था उस समय प्रधानमंत्री नेहरू थे

शीत युद्ध के दौरान नयी अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्वस्था का निर्माण

यूनाइटेड नेशन आर्गेनाईजेशन के व्यापार एवं विकास आंदोलन के तहत UNCTAD (United Nations Conference on Trade and Development-संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन ) का गठन हुआ

  • 30 दिसम्बर, 1964 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के अंतर्गत एक स्थायी अंतर-सरकारी संस्था के रूप में अंकटाड की स्थापना की गई थी। इसका मुख्यालय जेनेवा में है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र सचिवालय UN Secretariat का एक भाग है। इसके अतिरिक्त यह संयुक्त राष्ट्र विकास समूह (United Nations Development Group) का भी हिस्सा है।

अंकटाड के प्रमुख उद्देश्य क्या-क्या हैं?

  • अल्पविकसित देशों के त्वरित आर्थिक विकास हेतु अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रोत्साहित करना। 
  • व्यापार एवं विकास नीतियों का निर्माण तथा उनका क्रियान्वयन करना।
  • व्यापार एवं विकास के संबंध में यू.एन. की विभिन्न संस्थाओं के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए समीक्षा व संवर्द्धन संबंधी कार्य करना।

शीत युद्ध का दौर समाप्ति की ओर

शीत युद्ध के अंत के साथ ही सोवियत संघ का अस्तित्व भी समाप्त हो गया । 26 दिसंबर, 1991 को सोवियत संघ की सुप्रीम सोवियत ने अपने अंतिम अधिवेशन में सोवियत संघ को समाप्त किये जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया और स्वयं के भंग होने की घोषणा कर दी ।

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