shock therapy

शॉक थेरेपी (shock therapy) क्या है। शामिल देशो में इसका क्या प्रभाव हुआ

शॉक थेरेपी (shock therapy) – 

सोवियत संघ के पतन के बाद रूस, पूर्वी यूरोप ,और मध्य एशिया के देशो में साम्यवाद से पूंजीवाद की ओर संक्रमण के लिए  एक विशेष मॉडल अपनाया  गया जिसे  शाक थेरेपी (shock therapy- (आघात  पहुंचकर उपचार करना) कहा जाता है।

विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीए मुद्रा कोष द्वारा इस प्रकार के मॉडल को अपनाया गया। ‘शौक थेरेपी ‘में निजी स्वामित्व ,राज्य की सम्पदा का निजी कारण और व्यवसायिक स्वामित्व के ढांचे को अपनाया गया ,पूंजीकरण पद्ति से कृषि करना और मुक्त व्यापार  को पूर्ण रूप से अपनाना शामिल है।  
परन्तु साम्यवाद से पूंजीवाद से संक्रमण का यह बेहतर तरीका नहीं था क्योंकि पूंजीवाद सुधार तुरंत किये जाने की अपेक्षा धीरे धीरे किये जाने चाहिए थे एकदम से ही सभी प्रकार के परिवर्तनों को लोगो पर लादकर उन्हें आघात देना उचित नहीं था।

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शॉक थेरेपी ( shock therapy ) से होने वाले परिणाम


शॉक थेरेपी के परिणाम नागरिको के लिए अजीविका  कमाना कठिन हो गया

शॉक थेरेपी के कारण रुसी मुद्रा रूबल में गिरावट आई 

शॉक थेरेपी के कारण महगांई कई गुना बढ़ गयी

शॉक थेरेपी के कारण सोवियत संघ की औद्योगिक व्यवस्था कमज़ोर हो गयी

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